Internet Kya he or kon Malik he internet ka full guide

Internet Kya he or ko Malik he internet ka full guide

Helloआज दुनिया Internet निर्भर है जो हमारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। यह तेज गति से पूरे विश्व में फैल गया है और विभिन्न तरह की सुविधाएँ provide करके इंटरनेट ने हमारे जीवन को बहुत ही आसान बना दिया है। आज शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र होगा जहाँ Internet का use नहीं किया जाता है, इंटरनेट ने पूरी दुनिया को आपस में जोड़ रखा है लेकिन फिर भी बहुत कम लोग होते है जिन्हें इंटरनेट के बारे में पूरी तरह से पता होती है।

इंटरनेट की खोज और भारत मे शुरुआत


सन 1969 मे अमेरिका की Advanced Research Project Agency ने ARPANET की स्थापना की थी जिसके माध्यम से कंप्यूटर को आपस मे जोड़ा जाता था. 1980 मे इसका नाम Internet हो गया.


 इंटरनेट की शुरुआत January 1, 1983 मे हुई थी तब ARPANET ने TCP/IP तकनीक को ग्रहण किया था.भारत मे Publically इंटरनेट की शुरुआत VSNL द्वारा 14 August 1995 मे हुई थी.


इंटरनेट कैसे काम करता है?


इंटरनेट मे कंप्यूटर एक दूसरे के साथ छोटे छोटे networks के माध्यम से जुड़े होते है और ये नेटवर्क इंटरनेट backbone के साथ gateway के माध्यम से जुड़े होते है. यदि कोई कंप्यूटर दूसरे कंप्यूटर के साथ communicate करना चाहता है तो वो TCP/IP के माध्यम से कम्यूनिकेट करता है. TCP/IP सभी तरह के transmission को manage करता है, यह किसी भी Transmission या Information को छोटे छोटे packet या datagram मे तोड़ता है जिसका अपना address होता है और इसी address को source address कहा जाता है.


Internet का इतिहास :-

       इंटरनेट टेक्नोलॉजी के लिए सबसे पहले “Packet Switching ” का उपयोग 1960 में Paul Baram और Donald Devis के द्वारा किया गया था। Packet Switched नेटवर्क का मतलब जैसे NPL नेटवर्क ( लोकल एरिया नेटवर्क ), ARPANET (Advance research projects agency network) जैसे TCP /IP , Telenet का उपयोग किया गया था।


       ARPANET के द्वारा ही सबसे पहले TCP/IP का इस्तेमाल करके इंटरनेटवर्किंग के द्वारा अनेक नेटवर्क को जोड़कर Network का Networks  तैयार किया गया।

      ARPANET   तक पहुंचने के लिए 1981 में National Science Foundation (NSE) के द्वारा Computer Science Network (CSNET) को फण्ड दिया गया।  USA में ARPANET पर रिसर्च के लिए National Science Foundation (NSE) के द्वारा 1986 में सुपरकम्प्युटर उपलब्ध कराया गया।

 व्यवसायीकरण के तहत 1980 तथा 1990 के बीच में Internet Service Provider (ISP) बना और ARPANET की मान्यता रद्द कर दी गई।  Worldwide कनेक्टिविटी लोगों तक पहुंचाने के लिए ISP अनेक लेवल पर कार्य  करता है।
 इंटरनेट का इस्तेमाल करने के लिए हम Dial-up, ब्रॉडबैंड, wifi , Satellite और सेलुलर सेलफोन ( जैसे 3G या 4G ) का उपयोग करते है।  इसके इस्तेमाल से हम आसानी से इंटरनेट तक पहुंच बना सकते है।
   International Telecommunication Union (ITU) के अनुसार 2018 तक 48% लोग रेगुलर इंटरनेट का इस्तेमाल करते है।  जो 2012 में मात्रा 34% था।  इंटरनेट का इस्तेमाल करने के लिए सबसे अधिक मोबाइल का उपयोग किया जाता है।  मोबाइल के  द्वारा इंटरनेट का उपयोग आसान हो गया है।
 इंटरनेट में Internet Protocol (IP) का सबसे अहम् रोल होता है।  IP का शुरुआत IPv4 से हुई जो अभी तक उपयोग में लाया जा रहा है।  IPv4 को 4.3 बिलियन होस्ट को एड्रेस करने के लिए डिज़ाइन किया गया था।  परन्तु  इंटरनेट यूजर की बढ़ती संख्या को देखते जुए IPv6 में अपग्रेड किया गया।  जो तेज एड्रेसिंग के साथ अधिक क्षमता के साथ रूटिंग करता है।

Service of internet

Electronic Mail जाना जाता है E-Mail के नाम से जिसे इस्तेमाल किया जाता है | यह एक internet  user को real time में mail (message) भेजने की सुविधा देता है दूसरे internet  user तक विश्व में कहीं भी | एक mail को भेजने में कुछ seconds से लेकर कुछ minutes का ही वक्त लगता है उसके स्थान तक भेजने में क्योंकि ये mail ट्रेवल करता है एक network से दूसरे network तक इसीलिए इसको ये आवश्यक समय लगता है अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए | E-Mail service में अनेक प्रकार के mail भेजने की सुविधा होती है | सभी internet users के पास कोई न कोई E-mail address होता है यह सिर्फ उस पते की तरह होता है


E-mail address को हम ऐसे होता है उदाहरण – username@companyname.com |


E-mail की कुछ विशेषताएं:-


i.  यह तेज होता है paper mail से |


ii. Telephone की तरह user को जरुरी नहीं होता की उसी समय मौजूद हो वह इसे किसी भी समय देख कर reply कर सकता है |


iii. E-mail documents कंप्यूटर में save होते है इसीलिए इन्हे modification करना आसान होता है |

iv  यह पर्यावरण की रक्षा करता है क्यूंकि इसमें paper का इस्तेमाल न के बराबर होता है |
v   इसमें समय की बाध्यता नहीं रहती इसको हम कभी भी कर सकते है |

File Transfer Protocol (FTP):-


File Transfer Protocol को छोटे सब्दो में हम FTP भी कहते है | इसका इस्तेमाल computer user को file transfer करने के लिए करा जाता है एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में | फाइल किसी भी digital form में हो सकती है यह text, image, artwork, movies, sound इत्यादि हो सकती है | इसीलिए इन files को move करने के लिए FTP का इस्तेमाल किया जाता है | इसका process होता है पहले upload और बाद में जो उसे करता है वह इन्ही files को download कर सकता है |



Internet का मालिक कौन है

Internet कोई मालिक नहीं है और ना ही यह सेटेलाइट से चलता है। जिस तरह हम एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर से जोड़ने के लिए केबल use करते है। ठीक इसी तरह इन्टरनेट को एक देश से दुसरे देश तक पहुचाने के लिए भी समुन्द्र में cable बिछाई जाती है। यह Optical Fiber cable होती है जिसे Submarine Cable भी कहा जाता है।


Submarine Cable बिछाने और रख रखाव  का काम internet service provider करते है। बदले में यह इंटरनेट प्रोवाइड कर उससे पैसा कमाते है। भारत में पहली बार इन्टरनेट 14 August 1995 को  Videsh Sanchar Nigam Limited (VSNL) ने launch किया था।

दुनिया में 99 % इन्टरनेट इन्ही cable से use किया जाता है बाकि 1 % satellite से किया जाता है। आप दुनिया भर में फैले इन cable को इस वेबसाइट से देख सकते है।

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